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प्राचीन भारत (ANCIENT INDIA)

भारत की प्रागैतिहासिक जातियाँ और संस्कृतियाँ (Pre-Historic Races and Cultures in India)

भारत की इतिहास पूर्व जातियों और संस्कृतियों के विषय में निश्चय पूर्वक कुछ नहीं लिखा जा सकता। सर हरबर्ट रिस्ले (Sir H. Risley) ने इन जातियों को सात भागों में विभाजित किया है।भारत की प्रागैतिहासिक जातियाँ- 1 भारत की प्रागैतिहासिक जातियाँ-जातियों का वर्ग  (i) द्रविड़-रंग काला, काली आँखे, लम्बा सिर, चौड़ी …

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प्रागैतिहासिक काल (The Pre-Historic Time)

1 भूमिका इतिहास पूर्व विषय मानव की कहानी है जो दूर अतीत से शुरू होती है जब मनुष्य ने अपने पशु-पूर्वजों से सम्बन्ध विच्छेद किया और उस समय तक चलती है जब उसने अपने अस्तित्व का ऐसा रिकार्ड छोड़ा है जहां से ऐतिहासिक अन्वेषक वास्तविक जगत में पहुंच जाता है। …

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प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत (Sources of Ancient Indian History)

इतिहासकार भारतीय इतिहास को तीन भागों में बाँटते हैं। I. प्रागैतिहासिक काल-जिसका कोई लिखित साधन उपलब्ध नहीं है। II. आद्य इतिहास-जिसका लिखित साधन तो उपलब्ध है, किन्तु उसे अब तब पढ़ा नहीं जा सका है। इसके अंतर्गत हड़प्पा संस्कृति तथा वैदिक काल आते हैं। III. ऐतिहासिक काल-इसके अन्तर्गत लिखित उपलब्ध …

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प्राचीन भारतीय इतिहास का महत्व The Importance of Ancient Indian History

प्राचीन भारत का इतिहास हमें हमारे देश की प्राचीन संस्कृतियों के विकास, कृषि की शुरूआत, प्राकृतिक संपदाओं की खोज आदि की महत्वपूर्ण जानकारी देता है। यह हमें भारत में मानव का क्रमिक विकास-खेती, कताई, बुनाई, धातुकर्म, ग्राम व नगरों का विकास तथा बड़े-बड़े राज्यों की स्थापना की जानकारी देता है। …

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Geographical Setting of India and its Effects on History of India-भारत का भौगोलिक ढांचा और भारत के इतिहास पर इसका प्रभाव

भारत की भौगोलिक विशेषताएं (Geographical features of India)   स्वतंत्रता से पहले भारत 2500 मील पूर्व से पश्चिम तथा 2000 मील उत्तर से दक्षिण तक फैला हुआ था। यह 6000 मील भू-सीमा तथा 5000 मील समुद्री सीमा का 20 लाख वर्गमील क्षेत्रफल रखता था जो अमरीका का दो-तिहाई व इंग्लैंड …

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